Daily Prompt: Nuance

via Daily Prompt: Nuance

Advertisements

तू दौड़

तू दौङ,

तू दौड़ धडा धड़ दौड़।

इस दो फलाग़ की दुनिया के तू सारे लट्ठे तोड़।

तू दौड़,

तू दौड़ धडा धड़ दौड़।

जब तक छाती फट ती नहीं,

पथ की सीमा घटती नहीं,

इस् अन्त हीन आडम्बर की, बीमा पट्टी पटती नहीं,

तू दौड़।

तू दौड़ की तेरी नाडी में ओज का षटकोण ऐंठा है,

साँझ की चादर ओढे सूरज, तेरी सुबह की ताक मे बैठा है।

तू दौड़…… बस दौड़….

(Inspired from the energy build up in Delhi these days)